धर्म को विज्ञान और बुद्धि के अनुसार होना चाहिए

बहाई सिद्धांतो में से एक सिद्धांत यह है कि धर्म को विज्ञान और बुद्धि के अनुसार होना चाहिए। बहाई, जैसा कि उनका मानना है कि वह इस बात पर ज़ोर देते हैं यह कीमती रत्न (बात) पहली बार मिर्ज़ा हुसैन बहाउल्लाह ने बताई थी। आलमी अमान की इशाअत नामक पुस्तक में पृष्ठ नंबर 455 पर बहाउल्लाह ने लिखा है कि:

इसके अतिरिक्त, उसका यह दावा है कि धर्म को विज्ञान और बुद्धि के अनुसार होना चाहिए। अगर यह विज्ञान के अनुसार नहीं है और बुद्धि के सथ अनुकूलता नहीं करता तो यह बकवास है।

ऐसा कहा जा सकता है कि बहाइयों को गनी चुनी बातें भुलने की बीमारी है। वह इतनी आसानी से भुल गे हैं कि कुरआन मजीद जो अल्लाह सुब्हानहू तआला ने अपने अंतिम नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (स.अ.व.व.) उन पर अल्लाह की अपार कृपा और दया है) पर उतारी है वो पूर्ण से विज्ञान से अनुकूलता रखती है।

कुरआन मजीद की आयतें हैं जो कठिन और दिमागी उलझनों में भरपूर वैज्ञानिक शोधों को कुछ शब्दों में स्पष्ट कर देती है। जिसकी वैज्ञानिकों ने समय समय पर सत्यापन किया है।

उदाहरण के तौर पर महान पुस्तक की पहली लाइन ये कहती है सब प्रशंसा अल्लाह के लए है जो सारे संसार का रब है।

आयत स्पष्ट रूप से सुबूत देती है कि बाहर की दुनिया में हमारी जैसी ज़मीन है। और हाल ही में मिडिया ने ये बताया है कि वैज्ञानिकों ने हमारी आकाश गंगा से दूर हमारी पृथ्वी के जैसा तारा देखा है।

सिर्फ़ कुर्आन मजीद ही नहीं बल्कि हज़रत मुहम्मद (उन पर अल्लाह की अपार कृपा और दया हो) ने फ़रमाया है कि वोह ज्ञान का नगर और उनके जानशीन हज़रत अली उसका दवाज़ा है।

इस्लामी इतिहास महान हस्तियों से भरा पड़ा है जो कुरआन और अहादीस (हदीस) की मदद से समय के साथ नये नये द्वार खोल रहे हैं। जो लोग रसायन शास्त्र के सामान का उपयोग और व्यपार करते हैं वोह जाबिर बन हय्यान के नाम की कसम खाते हैं, जो मदीना मुनव्वरा में नबी करीम के परपोते इमाम जाफर सादिक़ कि पाठशाला है 4000 छात्रों में से एक थे।

पश्चिमी दुनिया रसायन शास्त्र के मैदान में जाबिर बिन हय्यान के काम के लिए उनको रसायन शास्त्र का पिता के नाम से जानती है। इस्लाम विज्ञान के साथ अनुकूलता रखता है उसके ऐसे अनगिनत उदाहरण उपलब्ध है।

लेकिन यहां, हम ठहर कर बहाई अकीदे के संस्थापकों के विज्ञान के मैदान में कुछ कृतर्क अनिष्ट और मुर्खता की तरफ इशारा करना चाहेंगे।

नीचे बहाउल्लाह और अब्दुल बहा के वैज्ञानिक रत्न (बातें) है जो बाबियों के लिए भेट स्वरुप पीछे छोड़ गए हैं:-

  • ताँबा सत्तर साल में सोने में बदल जाता है। उदाहरणार्थ: ताँबे के बारे में विचार करे, अगर उसे उसकी खान में ठोस बनने से सुरक्षित रखा जाए तो ये सत्तर बरस के अन्दर सोने की हालत में बदल जाएगा। (बहाउल्लाह, किताब, पृष्ठ 157)
  • उन्नतोदर रोशनी को एक वास्तविकता में बदल देती है जिससे उग्र गरमी पैदा होती है। (अब्दुल हामिद इशराक खावरी, अय्यामे तिस्आ, पृष्ठ 384)
  • ज़मीन की उम्र (दुनिया की उम्र) कुछ हज़ार साल है। (बहाउल्लाह, बहाउल्लाह के लेख, पृष्ठ 16)
  • कुछ जानदार अचानक पैदा किए गए है। (अब्दुल बहा, प्रकाशन मिस्र, भाग 2, पृष्ठ 24)
  • पौदों और जानवरों में नर और मादा के बीच में बिलकुल भी फ़र्क या अन्तर नहीं है। (अब्दुल बहा, उपदेश (तहेरान), भाग 2, पृष्ठ 149, 150)
  • पौदे कार्बन और हाईड्रोजन नाम के तत्व पानी से जिन्दा रहते हैं जो कि जानवरों के मुँह से निकलता है। (अब्दुल बहा, प्रकाशन मिस्र, भाग 1, पृष्ठ 459)
  • सूरज ख़ड़ा हुआ, स्थिर और एक ही जगह पर ठहरा हुआ है। (अब्दुल बहा, इल्मी अमान की इशाअत, पृष्ठ 417)
  • जितना ज़्यादा आप मज़लूम है उतहा ही बेहतर है। (बहाउल्लाह, इक्तेदारात, पृष्ठ 127)
  • अत्यचारी है विरुद्ध असंतोष प्रकट मत करो। (अब्दुल हामिद,इशराक़ खावरी, महदी आसमानी, भाग 8, पृष्ठ 44)
  • एक पी डाकलस दाऊद पैगम्बर का समकालीन था। और पायथागोरस सुलैमान पैगम्बर के समय में रहता था। (बहाउल्लाह की गोलियाँ, महान पुस्तक के बाद अवरोही, पृष्ठ 145)

(एम. पी. डाकलस का समय ईसा पूर्व 440-490 साल के बीच में था। जब कि दाऊद ईसा पूर्व 970-1040 साल के बीच में रहते थे।)

उनकी तारीखों के बीच में भी लगभग 500 सल का फर्क है।

  • क्रिस्तोफ़र कोलंबस ने अपने तर्को से अमेरीका की शोध की। अब्दुल बहा, कुछ सवालों के जवाब, पृष्ठ 144)

उपर दिए गए उदाहरणों से ये बात बिलकुल साफ हो जाती है कि बहाई धर्म किस प्रकार से अनुचित और अशिष्ट है। इसके बाद भी ये कहना की धर्म को विज्ञान और बुद्धि के अनुसार होना चाहिए एक महान मिथ्याचारिता के अतिरिक्त कुछ नहीं है।

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