मेरे स्वर्गीय पिता जी ने कुरान के अंतिम संदेश होने पर एक लेख लिखा था जो ख़त्मे नबूवत (सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम) की दलील के रूप में है। वह लेख इस वेबसाइट पर इस लिंक thebahaitruth.com पर मौजूद है।
यहाँ मैं एक और नज़रिया पेश करना चाहता हूँ और वह यह है कि कुरान सारी मानवता के लिए मार्गदर्शन है। यानी जो कोई भी खुद को इंसान कहता है, कुरान उसके लिए मार्गदर्शन है। ज़ाहिर है कि इससे किसी दूसरी किताब (न अक़दस और न ही इक़ान) की कोई ज़रूरत शेष नहीं रहती।
पवित्र कुरान अपनी बहुत-सी आयतों में सभी मनुष्यों को “ऐ लोगों!” (या अय्युहन्नास) कहकर संबोधित करता है।
इसके अलावा सूरह अल-अंबिया की आयत 107 में अंतिम नबी हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहे व आलेही व सल्लम) को सारे संसार के लिए रहमत बताया गया है।
सूरह अल-अनआम की आयत नंबर 19 में फ़रमाया गया है: “और मेरी ओर इसी कुरान की वह्य भेजी गई है ताकि इसके ज़रिए मैं तुम्हें और जिस-जिस तक यह संदेश पहुँचे, सबको सावधान करूँ।” यानी अगर कुरान हम तक पहुँच गया तो यह हमारे लिए अल्लाह की ओर से चेतावनी है।
हमसे पहले यह कुरान बाब और बहाउल्लाह तक भी पहुँचा था और उनके लिए भी अल्लाह की चेतावनी थी। लेकिन अफ़सोस कि उन्होंने सत्य को छोड़कर झूठे ढंग से खुद को अल्लाह का नियुक्त मार्गदर्शक बना लिया, और इस तरह उन्होंने खुद को नेकी के बदले से वंचित कर लिया, जैसा कि ख़ुद कुरान में स्पष्ट फ़रमाया गया है: “यह आख़ेरत का घर वह है जिसे हम उन लोगों के लिए निर्धारित करते हैं जो धरती में न ऊँचाई और न भ्रष्टाचार चाहते हैं, और अंतिम सफलता तो केवल डर रखने वालों के लिए है।” (सूरह अल-क़सस, आयत 83)
इसलिए कुरान को अल्लाह की वह्य मानना (जैसा कि बहाई मानते हैं) और फिर बाब, बहाउल्लाह और उनके नए-नए विचारों को मानना पूरी तरह विरोधी और असंभव है!