बहाई धर्म की सच्चाई
कुरान मजीद की निम्नलिखित आयतें हमें ईश्वरीय पैगंबरों द्वारा प्रस्तुत एकेश्वरवाद (तौहीद) के विश्वास के बारे में स्पष्ट समझ देती हैं। ये सभी पैगंबर एक ही आवाज में बोले और अपने मिशन में एकजुट थे।
सूरह हूद (11), आयत 25-26 में अल्लाह फरमाता है:
وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا إِلَىٰ قَوْمِهِ إِنِّي لَكُمْ نَذِيرٌ مُبِينٌ۔ أَنْ لَا تَعْبُدُوا إِلَّا اللَّهَ ۖ إِنِّي أَخَافُ عَلَيْكُمْ عَذَابَ يَوْمٍ أَلِيمٍ
“और हमने नूह को उनकी कौम की ओर भेजा (और उन्होंने कहा): निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए स्पष्ट चेतावनी देने वाला हूँ। कि तुम अल्लाह के सिवा किसी की इबादत न करो। निश्चय ही मुझे तुम्हारे लिए एक दर्दनाक दिन के अज़ाब का डर है।”
इसी सूरह की आयत 50 में अल्लाह फरमाता है:
وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمْ هُودًا ۚ قَالَ يَا قَوْمِ اعْبُدُوا اللَّهَ مَا لَكُمْ مِنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ ۖ إِنْ أَنْتُمْ إِلَّا مُفْتَرُونَ
“और कौम आद की ओर उनके भाई हूद को (भेजा)। उन्होंने कहा: ऐ मेरी कौम! अल्लाह की इबादत करो, तुम्हारे लिए उसके सिवा कोई माबूद नहीं। तुम तो केवल झूठ गढ़ते हो।”
सूरह माएदा, आयत 72-73 में कुरान कहता है:
لَقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ ۖ وَقَالَ الْمَسِيحُ يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ اعْبُدُوا اللَّهَ رَبِّي وَرَبَّكُمْ ۖ إِنَّهُ مَنْ يُشْرِكْ بِاللَّهِ فَقَدْ حَرَّمَ اللَّهُ عَلَيْهِ الْجَنَّةَ وَمَأْوَاهُ النَّارُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنْصَارٍ۔ لَقَدْ كَفَرَ الَّذِينَ قَالُوا إِنَّ اللَّهَ ثَالِثُ ثَلَاثَةٍ ۘ وَمَا مِنْ إِلَٰهٍ إِلَّا إِلَٰهٌ وَاحِدٌ ۚ وَإِنْ لَمْ يَنْتَهُوا عَمَّا يَقُولُونَ لَيَمَسَّنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
“निश्चय ही वे लोग काफिर हैं जिन्होंने कहा कि अल्लाह ही मसीह बिन मरियम है, जबकि मसीह ने खुद कहा: ऐ बनी इसराइल! मेरे और तुम्हारे रब की इबादत करो। जो कोई अल्लाह का शरीक बनाएगा, अल्लाह ने उस पर जन्नत हराम कर दी और उसका ठिकाना जहन्नम है। और ज़ालिमों का कोई मददगार नहीं होगा। निश्चय ही वे लोग काफिर हैं जिन्होंने कहा कि अल्लाह तीन में से तीसरा है… जबकि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं। और यदि वे अपने इस कथन से बाज़ न आए, तो उनमें से काफिरों को दर्दनाक अज़ाब होगा।”
सूरह माएदा, आयत 75 में लिखा है:
مَا الْمَسِيحُ ابْنُ مَرْيَمَ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِ الرُّسُلُ وَأُمُّهُ صِدِّيقَةٌ ۖ كَانَا يَأْكُلَانِ الطَّعَامَ ۗ انْظُرْ كَيْفَ نُبَيِّنُ لَهُمُ الْآيَاتِ ثُمَّ انْظُرْ أَنَّىٰ يُؤْفَكُونَ
“मसीह बिन मरियम केवल एक रसूल हैं। उनसे पहले भी कई रसूल गुजर चुके हैं। उनकी माँ सच्ची थीं। वे दोनों भोजन करते थे। देखो, हम अपनी निशानियों को कैसे स्पष्ट करते हैं, फिर भी देखो कि ये लोग कैसे भटक रहे हैं।”
सूरह बक़रा, आयत 285 में ज़ोर दिया गया है:
لَا نُفَرِّقُ بَيْنَ أَحَدٍ مِنْ رُسُلِهِ
“हम उसके रसूलों में से किसी के बीच भेद नहीं करते।”
सूरह आले इमरान, आयत 144 में कुरान फरमाता है:
وَمَا مُحَمَّدٌ إِلَّا رَسُولٌ قَدْ خَلَتْ مِنْ قَبْلِهِ الرُّسُلُ
“मोहम्मद केवल एक रसूल हैं, उनसे पहले भी रसूल गुजर चुके हैं।”
सूरह यूनुस, आयत 104 में है:
قُلْ يَا أَيُّهَا النَّاسُ إِنْ كُنْتُمْ فِي شَكٍّ مِنْ دِينِي فَلَا أَعْبُدُ الَّذِينَ تَعْبُدُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ وَلَٰكِنْ أَعْبُدُ اللَّهَ الَّذِي يَتَوَفَّاكُمْ ۖ وَأُمِرْتُ أَنْ أَكُونَ مِنَ الْمُؤْمِنِينَ
“ऐ मोहम्मद! कहो: ऐ लोगो! यदि तुम मेरे दीन के बारे में शक में हो, तो (जान लो कि) मैं उनकी इबादत नहीं करता जिनकी तुम अल्लाह के सिवा इबादत करते हो, बल्कि मैं उस अल्लाह की इबादत करता हूँ जो तुम्हारी मृत्यु का कारण बनता है, और मुझे आदेश दिया गया है कि मैं मोमिनों में से रहूँ।”
सूरह अनआम, आयत 103 में है:
لَا تُدْرِكُهُ الْأَبْصَارُ وَهُوَ يُدْرِكُ الْأَبْصَارَ ۖ وَهُوَ اللَّطِيفُ الْخَبِيرُ
“निगाहें उसे नहीं पा सकतीं, और वह निगाहों को पूरी तरह जानता है। वह सूक्ष्म और सर्वज्ञ है।”
सूरह अराफ, आयत 194 में कुरान फरमाता है:
إِنَّ الَّذِينَ تَدْعُونَ مِنْ دُونِ اللَّهِ عِبَادٌ أَمْثَالُكُمْ
“जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो, वे तुम्हारे जैसे ही बन्दे हैं।”
सूरह अंबिया, आयत 29 में है:
وَمَنْ يَقُلْ مِنْهُمْ إِنِّي إِلَٰهٌ مِنْ دُونِهِ فَذَٰلِكَ نَجْزِيهِ جَهَنَّمَ ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي الظَّالِمِينَ
“और उनमें से जो कोई कहे कि मैं अल्लाह के सिवा माबूद हूँ, तो हम उसे जहन्नम की सजा देंगे। इसी तरह हम ज़ालिमों को सजा देते हैं।”
सूरह अंबिया, आयत 25 में उल्लेख है:
وَمَا أَرْسَلْنَا مِنْ قَبْلِكَ مِنْ رَسُولٍ إِلَّا نُوحِي إِلَيْهِ أَنَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا أَنَا فَاعْبُدُونِ
“और हमने तुमसे पहले कोई रसूल नहीं भेजा, सिवाय इसके कि हमने उस पर वह्य की कि मेरे सिवा कोई माबूद नहीं, इसलिए मेरी ही इबादत करो।”
उपरोक्त आयतों से हम यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि सभी ईश्वरीय पैगंबरों ने, बिना किसी अपवाद के, लोगों को अल्लाह की इबादत की दावत दी और हमें उसका सबसे अच्छा बन्दा बनने की शिक्षा दी।
यदि बहाउल्लाह यह दावा करता है कि वह ईश्वरीय पैगंबर है और खुद को तथा बाब को इस सिलसिले की कड़ी मानता है, तो उसका संदेश भी ऐसा ही होना चाहिए और इसके विपरीत नहीं होना चाहिए।